धार्मिक त्योहारों के अवसर पर दिखा कौमी एकता का पैगाम, ‘युवा समाज सेवी कमेटी’ ने पेश की अनूठी मिसाल
स्थान/रिपोर्टर: मीरपुर कैंट / मोहित सैनी
धार्मिक आयोजनों के बीच समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। 11वीं शरीफ (गौसिया) के जुलूस और गणपति विसर्जन के पावन अवसर पर ‘युवा समाज सेवी कमेटी’ के सदस्यों ने एकजुट होकर सभी श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए शीतल जल (ड्रिंक्स) व अन्य सहायता सामग्री का शानदार इंतजाम किया।
“हर धर्म का सम्मान, समाज सेवा ही सर्वोपरि”
संवाददाता से बात करते हुए स्थानीय युवा मेहरेज आलम और उनके साथियों ने बताया कि वे सभी समाज सेवा से जुड़े हैं और हर त्यौहार को मिलकर आपसी प्रेम के साथ मनाते हैं।
कमेटी के मुख्य वक्ता ने जोश के साथ कहा:
“हम समाज सेवक हैं और हर धर्म व त्योहार का दिल से सम्मान करते हैं। चाहे हिंदू समाज का पर्व हो या मुसलमानों का, हमारे छोटे-बड़े सभी भाई एक साथ खड़े होकर व्यवस्था संभालते हैं। हमारे लिए सभी बराबर हैं।”
नफरत के खिलाफ मोहब्बत का पैगाम
देश में धर्म के नाम पर फैलाई जाने वाली नफरत के सवाल पर समिति के सदस्यों ने कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग हिंदू-मुसलमान के नाम पर नफरत फैलाते हैं, वे गंदी मानसिकता के शिकार हैं और केवल अपनी राजनीति या वोट बैंक के लिए ऐसा करते हैं।
बातचीत के दौरान वहां मौजूद हिंदू-मुसमुदान के युवकों (तरुण राम व अन्य) ने एक-दूसरे के गले में हाथ डालकर बेहद प्यारा संदेश दिया:
- “हम सब एक परिवार की तरह हैं: हमारा बचपन साथ बीता है, सुख-दुख में हम हमेशा पूरी ताकत के साथ एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।”
- “खून का रंग एक है: किसी को भी काटो तो लाल खून ही निकलेगा। हमारी मिट्टी और मां एक ही है।”
- “पैगाम-ए-मोहब्बत: पैगंबर मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने भी हमेशा मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया है। कयामत तक हमारा यह भाईचारा इसी तरह कायम रहेगा।”
नारा: “जाति-धर्म को छोड़ो, भाईचारा जोड़ो”
इंटरव्यू के अंत में युवाओं ने एकजुट होकर “जाति-धर्म को छोड़ो, भाईचारा जोड़ो” के बुलंद नारे लगाए और पूरे समाज को एकजुट रहने का प्रेरणादायक संदेश दिया। युवाओं की इस नेक पहल की स्थानीय लोगों और आने-जाने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिल से काफी सराहना की जा रही है।
